Kahanikacarvan

इस कदर प्यार है – 7

कार्तिक का कोई बस न चला और उसे झक मारे देव के साथ फिर अगले ही दिन उस गली में आना पड़ा| दोनों गली की एक चाय की गुमटी के पास खाली पड़ी बैंच पर आकर जमते आस पास देखने लगते है| सुबह के आठ ही बजे थे इसलिए गली में कोई ख़ास हलचल भी नही थी, चाय की गुमटी भी अभी आधी ही खुली थी जहाँ सुबह सुबह थोड़ी थोड़ी देर में कोई न कोई बिस्किट या बन लेने आ जाता| चाय को अभी अभी चढ़ाया गया था जिससे सुबह की ठंडक में गर्म चाय की खुशबू समां कर माहौल को उष्म बनाए थी|

दोनों चाय के इंतजार में बिस्किट कुतरते बातों के झल्ले उड़ा रहे थे|

“यार सुबह सुबह बिस्किट खाकर कुत्ते वाली फिलिंग आ जाती है – समोसा खाना चाहिए था |”

जबरन बिस्किट का आखिरी टुकड़ा मुंह के अन्दर ठूँसता हुआ कार्तिक बोला तो देव उसे घूरता हुआ उसकी तरफ झुकते हुए दबे स्वर में बोलता है –

“चुपचाप बैठा रह यहाँ चाहे फालतू की बकवास ही क्यों न कर|”

“बैठा तो हूँ और फालतू की बात ही करा रहा है तू|”

“नीमा की बात कर समझा|” अबकी फिर दबे स्वर में कहता घूरता है उसे|

“हाँ यही काम बचा रह गया – अता न पता फिर भी चुड़ैल की तरह सर पे घूम रही है – जब से साला वो जलेबी खाई तब से अच्छी खासी जिंदगी में मिर्ची घुल गई |”

“तो बिस्किट ठूस न तेरे कलेजे तक मिठास आ जाएगी |” अबकी उसे चिढाते हुए देव बोला तो कार्तिक मुंह बनाए अगला आधा बिस्किट फेंक देता है तभी दोनों देखते है कि वही बैठा एक कुत्ता उस आधे बिस्किट को लपकते भागने लगा ये देख देव कार्तिक को देखता हुआ और कसकर हँस पड़ता है|

“का भैयाजी जी कोई चुटकला सुनाए है !” अब दोनों का ध्यान आवाज की तरफ जाता है वो चाय वाला दोनों के बीच में चाय की कुल्लड रखता उन्हीं को देख रहा था|

दोनों बिलकुल फालतू दिख रहे थे और उस वक़्त उस चाय वाले के पास भी कोई काम नही था इसलिए उनके बीच बैठता वो भी चाय सुडकने लगता है|

देव अब उसकी तरफ देखता हुआ पूछता है – “अच्छा ये बताओ इस गली में कोई ऐसा है जो कुछ दिन दिखा हो और फिर कुछ दिन नहीं दिखा हो |”

देव के प्रश्न से चाय वाले का दिमाग घूम जाता है जिससे अपनी खोपड़ी खुजाते हुए वो बोलता है – “ऐसा कैसे जो दिखा होगा तो फिर बाद में क्यों नही दिखेगा भैयाजी – और जो नही दिखा तो पहले भी नही दिखा होगा इससे जो दिखा ही नही वो पहले हो या बाद नही दिखेगा न |”

चाय वाले की बात सुन अब दोनों की खोपड़ी चकरा गई|

तभी कोई चाय मांगने आता है तो वह उठता हुआ अंगीठी की ओर चल देता है| उसके जाते कार्तिक चाय सुड़कते हुए बोलता है – “सारा मुहल्ला ही पागलों का है क्या !! लेकिन चाय अच्छी है |”

“हाँ लगता है जैसे नीमा के हाथों की चाय पी रहा हूँ बिलकुल वैसे ही जैसे हम कभी एकदूसरे की जूठी चाय पी लेते थे|”

“छी… |”

“छी क्या अबे प्यार है |”

“अबे झंड प्यार है – सुनके ही गन्दा लगता है |”

“गन्दा क्या है बे इसमें !!”

“गन्दा ही है |”

“अबे गन्दा है तू – भूल गया पिछली होली में भांग खाकर क्या गन्दी गन्दी गाली देता फिर रहा था |”

“हाँ तो दिमाग में चढ़ा था नशा तो हो गया और तू होश में ही गन्दी बात कर रहा है|”

“गन्दी कैसे हुई ये बात !!”

“हाँ गन्दी ही है क्योंकि मैं कह रहा हूँ |”

“देख बे गन्दा बोलेगा तो मार दूंगा |”

“अबे तू मुझे मारेगा !!”

“हाँ नीमा के लिए |”

दोनों बुरी तरह से एकदूसरे के सामने अड़ गए थे, लगने लगा जैसे अब एकदूसरे को मार बैठेंगे ये देख चाय वाला हैरान उनकी ओर देखने लगा तो तब से वहां बैठा एक अधेड़ अपनी चाय खत्म कर कुलहड़ फेंकता उनका बीच बचाव करते उन्हें रोकता हुआ बोला – “क्या फालतू की बात पर दोस्त से झगड़ा कर रहे हो – अच्छी बात नही है ये |”

इससे दोनों एकदूसरे से मुंह फेरते शांत बैठ जाते है|

“दोस्तों को एक लड़की के लिए नहीं लड़ना चाहिए – |”

“आप जानते है नीमा को ?” 

अचानक से देव उस अधेड़ से प्रश्न कर बैठा जिससे वह एकदम से अचकचा कर उसकी ओर हैरान नज़रों से देखने लगा |

“आप जानते है नीमा नाम की किसी लड़की को !!”

“न नही बिलकुल नही – |” वह न में सर हिलाते घुटने पर हाथ रखे उठने लगते है|

इससे कार्तिक दबी आवाज में देव के कानों के पास आता फुसफुसाता है – “पागल है क्या बुढऊ से लड़की का पता पूछ रहा है इनकी शक्ल देखकर ही लगता है कि इनको किसी बुढ़िया का पता भी नही मालूम होगा |”

देव वाकई परेशान हालत में था, वह नीमा की खोज में पूरी तरह से असफल रहा था जिससे अब उसकी वो हालत हो गई थी कि वह हर राह चलते इन्सान से नीमा के बारे में पूछना चाह रहा था| इसी कारण वह जबरन नीमा की बातें करते अपने आस पास मौजूद उस अज्ञात शख्स को को खोजना चाह रहा था| कार्तिक देखता है कि अब वह अधेड़ वहां से जाने के लिए कोई सामान का भरा बोरा उठाकर एक रिक्शे को रोक रहा था पर रिक्शावाला मुंह बनाए ज्यादा किराया बताने लगा| देव देखता है कि कुछ देर उससे बहस करने से जब रिक्शा वाला वापस जाने लगा तब वह अधेड़ उसे वापस बुलाकर उसी में बैठकर चला गया|

“सनकी बुड्ढा |”

तब कार्तिक और देव जिनका ध्यान उस अधेड़ पर था अब वे आवाज की दिशा पर देखते है| वही चाय वाला उस जाते हुए अधेड़ को घूरते हुए बोल रहा था|

“सनकी क्यों ?” कार्तिक पूछ बैठता है|

“सनकी नही बोले तो क्या बोले – हर तीसरे चौथे दिन यही काम है – रिक्शा बुलाना और बहस करके फिर उसी में बैठकर चले जाना – तो सनकी ही न हुआ |”

कार्तिक भी जैसे बात से इत्तफाक रखता हाँ में हाँ मिलाता है|

“पागलों की बस्ती लगती है|”

कार्तिक बडबडाया पर उसकी बडबडाहट चाय वाले ने सुन ली|

“सही कहे है भैयाजी – पागलों की बस्ती ही लगती है और उन सब पागलों का इ है सरदार –  बीवी के मरने के बाद भैयाजी अच्छी खासी नौकरी छोड़कर दुकान कर ली बुढऊ ने – कहे तो लो भला कोई करता है ऐसा!!” चाय वाला अपने पूरे खाली वक़्त का सदुपयोग करता अब उनके बीच पंचायत करने बैठ गया|

देव को उसकी बेमतलब की बात पर कोई रूचि नही हुई तो वह कार्तिक को इशारा करते उठने लगा|

देव उस दुकानदार की बक बक से उबता हुआ अब उठकर जाने को तैयार हो रहा था वही दुकानदार अपनी बक बक जारी किए था –

“वो भी कॉपी किताब की दूकान – अच्छा चलो खोल भी ली तो हमारा मुन्ना जब किताब लेने पहुंचा तो भगा दिया कि बंद है तो बोलो हुआ न सनकी..|”

चाय वाले की बात अधूरी रह गई अचानक से देव उसकी तरफ मुड़ता हुआ दोनों हाथों से उसका कॉलर थामता हुआ उसे घूरने लगा| इससे अगले ही पल उसके चेहरे पर घबराहट आ गई|     

“तुमने क्या कहा – कॉपी की दूकान !!”

“का भैयाजी हम कुछ गलत बोल दिए का – का कोई और भाषा में कॉपी किताब गाली होती है क्या !!” चाय वाला देव की मजबूत कदकाठी को देखता हुआ चरमरा गया था|

“उसके बारे में और कुछ बताओ |”

देव अब खुद पर नियंत्रण रखता हुआ उसका कॉलर छोड़कर उसकी पीठ थपथपाते हुए पूछ रहा था|

“भैयाजी हनुमान जी के चरणों की कसम अब ज्यादा कुछ तो नही जानते बस यही से रोज गुजरते देखते है – उसकी दुकान बंद है तो पैसे के लिए सुना है हर दूसरे तीसरे दिन घर का ही कोई सामान बेचने जाता है ऊपर से इतना बड़ा घर तो एकदिन तरस खाकर हम कोनों किरायदार बता दिए तो उल्टा हमपर ही भड़क गया – घर बंद रहेगा पर कोई किरायदार नही रखेगा और ऊ आप बिजली वाला खम्बा देखते है उसी के सटा हुआ सफ़ेद रंग का घर उसी का है |”

“कौन कौन है उसके घर में ?”

“अब उ तो हमका पता नही बीवी के मरने के बाद अकेला रहता है और कोई बेटी थी उसका हमका पता नही – रहता भी कहाँ है भैयाजी जी पूरा दिन तो घर यूँही बंद रहता है पर आप काहे पूछ रहे है भैयाजी – कोई सीरियस मैटर है का !!” अब चाय वाला देव की उडी उडी हालत पर नज़र घुमाता हुआ पूछता है|

लेकिन देव उसकी बात का कोई जवाब देने के बजाये कार्तिक को इशारा कर उस घर की ओर चल देता है| तब से देव की पूछताछ से कार्तिक बहुत उलझा हुआ दिखाई देने लगा था वह देव के पीछे पीछे चलता बार बार उससे पूछ रहा था पर कोई बात का जवाब देने के बजाये तने तेवर से अब वह दरवाजे के ठीक सामने खड़ा उस ताले को घूर रहा था|

कार्तिक एक बार देव को देखता तो कभी दरवाजे पर जड़े ताले को |

“भाई तू ताले को घूर क्यों रहा है – आँखों से खोल देगा क्या !”

जिस हलके तरीके से हँसते हुए कार्तिक ये बात कहता है उसके विपरीत देव सख्त लहज़े में कह उठा –

“पत्थर ला ताला तोडना है |”

“अबे क्या बात कर रहा है – देख मैं न पत्थर लाऊंगा न ताला तोडूंगा – तू बहुत कर लिया – अब तू कोई मनमानी मुझसे नही करा सकता |”

ये सुन देव पीछे घूमकर अपनी सख्त ऑंखें कार्तिक के चेहरे पर गडा देता है|

“देख बे – मैं पत्थर ले आऊंगा पर तोडूंगा तो बिलकुल नहीं –|” अपने में ही झुंझलाया कार्तिक कहीं से पत्थर का बड़ा हिस्सा ढूंढ़ कर लाता देव की तरफ बढ़ाता है पर देव पत्थर लेने के बजाये उसे अभी भी घूर रहा था जिससे कार्तिक उसके आगे गिडगिडा उठा – “देख मेरे भाई मेरे खानदान में किसी ने दांत से कभी अखरोट नही तोड़ा तो मैं ताला कैसे तोडूंगा !!”

कार्तिक का मना करना बिलकुल निष्फल रहा और बडबडाते हुए उसे ताले पर चोट मारनी ही पड़ी|

“भाई देख बहुत मुश्किल में फंस जाएँगे हम – यार ये क्या करा रहा है मुझसे – देख मेरे भाई अभी भी मान जा किसी के घर का ताला तोड़कर क्यों जेल का प्रोग्राम बना रहा है – अबे मैं एक दिन भी समोसा खाए बिना नहीं रह सकता – समझता क्यों नही |”

देव पर जैसे अब कुछ असर ही नही हो रहा था वह किसी धुनी की तरह दरवाजे को धक्का देकर अन्दर प्रवेश कर जाता है| कार्तिक को भी उसके पीछे पीछे घर के अन्दर जाना पड़ता है| देव घर में प्रवेश करते एक सरसरी निगाह से उस घर की हालत देखता है, बाहर से बड़ा न दिखने वाला ये घर अन्दर से वाकई बड़ा था, कमरे दर कमरे पार करता कार्तिक जैसे कुछ ढूंढ़ रहा था, कार्तिक भी चुपचाप उसके पीछे पीछे चल रहा था क्योंकि उसे पता था वह कुछ पूछेगा भी तो देव कोई जवाब नही देने वाला| घर की हालत काफी खराब थी| जगह जगह से प्लास्टर उखड़ा हुआ था जिससे वह घर ऐसा गन्दा दिख रहा था मानों सालों घर की सफाई न हुई हो| देव अब किसी चीज को पाता उसे गौर से देख रहा था वह कोई कम्बल था|

“ये तो वही है |”

“वही मतलब !!” संशय में पड़ा कार्तिक भी झुककर उसकी तरफ देखता है|

“उस रात जो अँधेरे में भिखारी बैठा था बिलकुल ऐसा ही कम्बल था उसके पास –|”

कार्तिक उस गंदे मटमैले कम्बल को दूर से ही देखता बोलता है – “इतना गन्दा कम्बल तो हर भिखारी के पास मिल जाएगा – देख देव अब तेरी इन्क्यवारी हो गई हो तो चले वापस |”

“हो न हो उसी ने मेरे पीछे से वार किया होगा कही ये बुड्ढा ही तो भिखारी बनकर नही वहां बैठा था !!”

अब तक ताला तोड़ने की आवाज से वो चाय वाला उन दोनों को शक की नज़र से देखता पुलिस को फोन कर चुका था|

देव घर के काफी अन्दर तक हो आया पर गंदे घर के सिवा उसे कुछ भी नही मिला, उसके दिमाग में प्रश्नों की अच्छी खासी खिचड़ी सी पक गई थी, जब बहुत देर तक उसे कुछ समझ नही आया तो कार्तिक की ओर देखता हुआ देव कहता है – “चलते है|”

ये सुनते कार्तिक एकदम से मुस्करा पड़ता है, उसकी मन की मुराद जो पूरी हुई कि तभी एक साथ वे बारह बजे की अज़ान की आवाज को सुनते है जिससे देव एकदम से चौंकता हुआ कार्तिक की ओर मुड़ता है|

“क्या हुआ ?”

“कार्तिक मैं जब किसी अँधेरे कमरे में बंद था तब अँधेरे में मुझे कुछ दिखाई नही दिया पर अज़ान की आवाज मैंने सुनी थी बिलकुल ऐसे ही इतनी ही दूरी से – मतलब |”

“मतलब कि तुझे यही रखा गया था !!”

देव जल्दी से अब अच्छे से कमरे को खंगालने लगता है तो अगले ही पल उनकी ऑंखें हैरानगी से फैली रह जाती है, वे कमरे के कोने में कापियों का ढेर पाते है, देव उनके पन्ने पलटते और हैरान हो जाता है, वह बिलकुल वैसे ही थे जिनपर नीमा के लिखे खत मिलते थे| वह जल्दी जल्दी सारी कापियों खंगाल डालता है| वे सब कोरी कॉपी थी बिलकुल वैसी ही जैसी उसे अपनी तलाश के दौरान मिली थी वह हर पन्ने को अच्छे से देखने लगा और उम्मीद से उसे फिर लिखा हुआ एक कागज मिलता है..नीमा का खत

अब हैरान दोनों एकद्सरे को देख रहे थे कि अचानक किसी आहट पर उनका साथ में ध्यान जाता है| अगले ही पल दोनों ने जो अपने सामने देखा उससे दोनों के पैर ही उखड़ गए| सामने एक इन्स्पेक्टर के साथ दो कांस्टेबल थे जो अपनी सख्त नज़र से उन दोनों को घूर रहे थे| इससे पहले वे कुछ पूछते या देव ही कुछ जवाब देता कोई अदनी सी आहट उन सबका ध्यान एक ओर ले गई| अब वे उस आवाज पर ध्यान लगाते उसकी दिशा का पता करते है तो आवाज किसी दरवाजे के पीछे से आ रही थी जिसकी ओर वे सब तेजी से बढ़ जाते है|

आखिर क्या मिलेगा उन्हें दरवाजे के पीछे? क्या सच में देव नीमा को खोज लेगा ?जानने के लिए पढ़ते रहे…

क्रमशः………

                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                           

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