Kahanikacarvan

एक राज़ अनसुलझी पहेली – 62

नंदनी अचानक से अपने बापू को देख पहले तो खुश हुई फिर हैरान उसे छूती हुई कह उठी – “बापू क्या सच में ये तुम हो या पिछली बार की तरह कोई भ्रम हुआ म्हारे को !”

इस पर भुवन उसका कन्धा पकड़कर उसे हिलाते हुए कहता है – “किया बात करे है लाडो – यहाँ थारे बारे में सोच सोच कर म्हारा माथा फटा जा रिहा है – ये मिया किया देख रहा हूँ – वो छोरी तो जिन्दा महल में रहे है और जो थारा ब्याह हुआ उसका क्या – तूने किसी को अब तक न कही ये बात – आपणी माँ से भी नही – पण तू चिंता न कर – म्हारे फोन में उस दिन की तस्वीर है – अब मई थारे को थारा अधिकार दिलाऊंगा  – तू कोणी चिंता न कर |”

“न बापू अभी ऐसा कुछ न करणा – यहाँ बहुत गड़बड़ है –  वो वो कोई बिन्दनी नहीं बल्कि कोई छाया है |”

“छाया !!” भुवन का मुंह आश्चर्य से गोल खुला रह गया|

“बापू तुम आराम से बैठो तब सब समझाती हूँ |” इतना कहती नंदनी भुवन को कमरे के एकांत में ले जाकर शादी के बाद की सारी घटना बता देती है जिसे सुनते भुवन सर पकड़े बैठ जाता है| नंदनी का मुंह भी रुआंसा हो उठा था फिर एकाएक  भुवन उठता हुआ बोल पड़ा –

“लाडो गर जो तू बोले है यही हुआ तो ये सही न है – वो जो भी है इन्सान तो कतई न है पण है कौन ? और यहाँ कीसे आई ? आपणी माँ को बताया ये सब तन्ने लाडो ?”

इस पर नंदनी न में सर हिलाती हुई कहती है – “नही बता सकी – पता नही माँ म्हारे पर विश्वास करे न करे – इस बात का कोई सबूत भी तो न !”

इसपर भुवन अब पुनः बैठते हुए अपनी मुछों के किनारे एंठते हुए धीरे से कहता है – “तू दूर से उस कक्ष पर नज़र रख लाडो बाकि मई पता करूँ हूँ कि इसके पीछे कोण है ?”

नंदनी सोचती हुई अपने होंठ भीतर दबाती हुई बैठी रही|

राजगुरु ने आधी रात में पूजा करने की बात बता दी जिसकी तैयारी में वह लग गया| रात में रूद्र अनामिका और शौर्य के साथ महल छोड़ देते है| वे सभी सैंड ड्युन्स पहुंचकर अपने चार्टेड प्लेन से दिल्ली पहुँचने वाले थे| जिस ख़ामोशी से वे रास्ता तय कर रहे थे उसके कही गुना उनके मन में उथल पुथल जारी थी|

जॉन ने शाम घिरते सारे कैमरा अनएबल कर दिए जिससे अनिकेत महल के अन्दर आसानी से जा सके| अब तक अनिकेत कैमरे से काफी हद तक महल का काफी हिस्सा समझ चुका था जिससे नवल का कक्ष पता करना उसके लिए कोई कठिन बात नहीं रह गई थी| वह गलियारा पार करता आखिर उस कक्ष के बहुत नजदीक पहुँच चुका था| वह कुछ पल रूककर किसी कोने में खड़ा होकर मुट्ठी में रुद्राक्ष लिए आंख बंद किए दो पल का ध्यान करता ही है जल्दी से हाथ झिड़क देता है| वह हैरान अपनी हथेली को देखता रहा जो जलन से भर उठी थी मानो रुद्राक्ष नही उसने कोई जलता अंगारा पकड़ लिया हो| वह हथेली हवा में हिलाते खुद को राहत पहुंचता मन ही मन बुदबुदाता है – ‘यहाँ तो बहुत ही तगड़ी निगेटिव ऊर्जा है – जरुर वह कमरा यही कही होगा |’ सोचते हुए अनिकेत जमीं में पड़ी माला उठाने झुकता ही है कि उसे कई जूते एकसाथ दिखते है तो अवाक् वह चौंक कर सामने देखता है तो उनकी ऑंखें हैरान रह जाती है| वे अंगारा हुई आँखे अब उसी पर जमी थी|

“नवल !!”

अनिकेत सामने नवल को देख हैरान रह गया| उसके अचानक सामने आ जाने का उनसे सोचा ही नहीं था जबकि वह पता कर चुका था कि वह यहाँ है ही नही| नवल के पीछे उसके कुछ आदमी भी मौजूद थे|

नवल जलती आँखों से उसे घूरता उसके ठीक सामने तनकर खड़ा होता हुआ चीखा – “तुमने क्या समझ लिया कि तुम हमारे पीठ पीछे अपने नापाक इरादे पूरे कर लोगे – तुम्हे किसने बुलाया !! क्या पलक ने !! वाह हमारी नाक के नीचे इतना बड़ा कांड होने जा रहा था – वाह |”

“नवल !!” अनिकेत गुस्से में जबड़े भींचते सरगोशी करता है – “तुम्हारे जैसा ही व्यक्ति इतना घटिया सोच सकता है |”

“हमारे महल में रात में चोरी से घुसने वाला उल्टा हम पर गरज रहा था -|” दांत पीसते हुए नवल चीखा|

“कभी कभी सही चीजे गलत तरीके से करनी पड़ती है – अभी तुम जानते नही हो कि मैं यहाँ क्यों आया हूँ – मैं….|”

अनिकेत की बात अधूरी रह गई उससे पहले ही नवल के साथ खड़े नागेन्द्र जी उसे घूरते हुए बोल उठे – “कुंवर सा आप इसकी बकवास क्यों सुन रहे है – आप कहे तो अबकी इसका पर्मानेट इंतजाम कर दे |”

नागेन्द्र जी की आवाज सुन अनिकेत का सारा ध्यान उसी की ओर जाता है जिससे वह सोचते हुए जल्दी से कह उठा – “ये आवाज !! ये आवाज तो वही है – ओह तो तुम वही हो जिसने मेरा एक्सीडेंट कराया था – मैं सही था इन सबके पीछे नवल तुम्हारा ही हाथ था !”

“हाँ क्योंकि जिस चीज को हम पाना चाहते है उसे हर हर हाल में पाकर रहते है –|”

“तुम्हारे लिए पलक कोई वस्तु होगी पर मेरे लिए नहीं अगर सच में वह तुमसे प्रेम करती तो ईश्वर की सौगंध मैं खुद उसके रास्ते से हट जाता पर जो तुमने किया वो सही नही था|”

“अब तुम बताओगे हमे सही और गलत – खुद को देखो – आखिर क्यों तुम छुपकर हमारे महल में दाखिल हुए और तुम्हे क्या लगा ये सब आसानी से तुम कर लोगे – हम तो तुमपर तब से नज़र रखे थे जब से तुम लखनऊ वापस आए और फिर जैसल – बस हम रंगे हाथ तुम्हें पकड़ना चाहते थे इसलिए एक दिन पहले ही हम महल वापस आ गए पर तुम्हारे जैसे रोड़े को हम पूरी तरह से मिटा नही सके इसका हमे बहुत मलाल है|” कहता हुआ नवल तेजी से आगे आता अनिकेत की गर्दन अपने पंजे में पकड लेता है, इससे अनिकेत भी तुरंत उसकी ओर बढ़ता उससे पहले ही नवल के तैयार आदमी तेजी से अनिकेत के पीछे आते उसे पकड लेते है| चार आदमी उसे कसकर पीछे से पकडे थे तब भी वह मजबूत काठी हिलाते नवल के पंजे से खुद को छुडाते हुए चीखता है – “पागल मत बनो नवल – अभी ये सब कहने सुनने का वक़्त नही है – तुम खुद बहुत बड़ी मुश्किल में हो – अगर अभी मैंने तुम्हारी मदद नही की तो तुम बहुत कुछ खो दोगे – बात तो समझो |”  

“बंद करो बकवास |” नवल कसकर चीखा तो नागेन्द्र जी अनिकेत के पीछे आते उसके सर कर प्रहार करते है जिससे वह अपना होश खोता लहराता जमीं पर गिर पड़ता है|

अब जमीं पर पड़े अनिकेत को घूरता हुआ नवल गुस्से में बोलता है – “जब तक हम सोचते है कि इसका हमे क्या करना है तब तक इसे आप नीचे तहखाने में फिकवा दीजिए |”

“जो हुकुम सा |” नागेन्द्र जी झुककर हुकुम लेते अपने आदमी से अनिकेत को उठाने का इशारा करते है| जब तक वे अनिकेत को वहां से ले जाते है नवल वही खड़ा उस दृश्य को अग्निय नेत्रों से देखता रहा| वहां कोई और भी था जो ये दृश्य देख रहा था|

नंदनी जो तब से ये सारा दृश्य अपनी आह दबाए देख रही थी पर उनके बीच आने की वह हिम्मत न कर सकी| पहले तो नवल को अचानक महल में देख वह चौंक गई क्योंकि उसका आना वह जान ही नही पाई|

नवल अब सबके जाते अपने कक्ष की ओर बढ़ रहा था ये देखते नंदनी के हलक से कोई दबी चीख निकल गई| वह बढ़कर नवल को रोकना चाहती थी पर कैसे रोके !!! और क्या कहे !! यही खड़ी सोचती रह गई और तब तक नवल ने एक झटके में वह दरवाजा खोल दिया|

सैंड ड्युन्स पहुंचकर रूद्र शौर्य को अनामिका को ले जाने की बात करता है जिसे सुनते शौर्य अचरच से पूछ उठा – “आप क्यों नही जा रहे भाई सा ?”

“शौर्य हमे कुछ ठीक नही लग रहा – कुछ तो है ऐसा जो माँ सा हमे नहीं बता रही – आप बस अपनी भाभी सा को सुरक्षित पहुंचा दे – हम बाद में आते है|”

“ऐसी बात है तो भाई सा तो हम भी आपके साथ यही रुकते है और फिर नवल भाई सा तो है वही पर |”

“नही अगर आप भी रुक जाएँगे तो माँ सा और भी नाराज़ हो उठेंगी – आप तो कम से कम पहुँच जाए|”

“पर भाई सा आप अकेले !!”

शौर्य की चिंता पर उसके कंधे पर हाथ रखते हुए रूद्र कहते है – “आप हमारी फ़िक्र मत करिए – हमे जैसे ही आपकी जरुरत होगी – हम तुरंत आपको बुलवा लेंगे|”

“ठीक है भाई सा |” एक गहरे उच्छ्वास के साथ शौर्य रूद्र को आँखों से भरोसा देता है|

ज्यो ज्यो समय बीत रहा था रचित के लिए झलक की स्थिति देख पाना और भी मुश्किल होता जा रहा था| वह हॉस्पिटल आना तो नही चाहता था पर उसका मन इस कदर मजबूर हो गया कि वह किसी भी बात की बिना परवाह किए हॉस्पिटल आ ही गया| झलक अभी तक बेहोश थी| डॉक्टर उसके आस पास मौजूद हुए उसके शरीर से जुडी मशीन पर का डाटा चेक कर रहे थे| साँसे अभी सामान्य थी फिर भी वह होश में नही आई इससे डॉक्टर दुबारा उसका चेकअप करने में लगे थे| रचित भी वार्ड के अन्दर आता सब देख रहा था|

“कैसी हालत है अब इनकी ?”

रचित की आवाज सुनते डॉक्टर अब उसकी तरफ देखते हुए कहने लगे|

“हाँ अभी रानी साहिबा का भी फोन आया था – अभी भी इनकी हालत वही है – पल्स, बीपी सब नार्मल है फिर भी पता नही क्यों होश में नहीं आई अगर ऐसा ही रहा तो इनका कोमा में जाना तय है|” बेहद शुष्कता से अपनी बात खत्म करता डॉक्टर अब वार्ड से बाहर चला जाता है|

अब वार्ड में रचित अकेला रह गया| वह डॉक्टर के निकलते वापस चला जाना चाहता था पर वह भी नही समझ पाया कि आखिर क्यों वह झलक के पास आने से खुद को रोक नही आया| उसकी नज़रो के सामने झलक की बेजान देह पड़ी थी जिसे देखते उसकी नज़र नम हो उठी| वह कुछ पल तक उसके उस मासूम चेहरे को निहारता रहा| आखिर आज से पहले कहाँ उसने कभी उसके चेहरे की ओर गौर से देखा था हर पल तो उसकी ओर देखते उसकी चंचल निगाह पर ही उसकी नज़र टिक जाती और आज वही नज़रे कितनी खामोश हो चुकी थी मानों पहाड़ो से उतरती नदी को एकाएक किसी ने बांध दिया हो| कितनी तरंग थी इन आँखों में और आज वही कितनी बेजान सी पड़ी थी| वह उसे देखता धीरे से बुदबुदा उठा – “मुझे माफ़ कर देना – सब कुछ अपनी आँखों से सामने होते देखते हुए भी मैं कुछ नही कर पा रहा – काश मैं तुम्हारे लिए कुछ कर पाता पर झलक ऐसे तो मत जाओ – कम से कम एक बार आँख खोलकर अपने सच का सामना करो – हारना किसी भी प्रोबलेम का सेलुशन नही – कम से कम उनके लिए वापस आ जाओ जो तुम्हे ऐसा कभी नही देखना चाहेंगे |” कहते हुए रचित कब झलक का हाथ पकड लेता है खुद भी नही जान पाता पर कुछ चमत्कार हुआ उसी पल और उसकी मशीन की प्रतिक्रिया तेज हो उठी जिससे वार्ड के बाहर बैठी नर्स तेजी से अन्दर आती है| रचित अब उसका हाथ छोड़कर किनारे खड़ा देखने लगा कि दूसरी नर्स के साथ डॉक्टर अब वहां तेजी से प्रवेश करते है|

रातें भयावह हो उठती है जब ख़ामोशी से अचानक उग्र हो उठती है…तो आखिर क्या होगा इस भयानक रात में अगला भाग का करे बस थोड़ा इंतजार……

.क्रमशः………..

One thought on “एक राज़ अनसुलझी पहेली – 62

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!