Kahanikacarvan

एक राज़  अनुगामी कथा  – 24

इन कुछ दिन पलक परेशान तो रही लेकिन न उसने किसी से कुछ कहा न ही अनिकेत को फोन किया| पर शायद अनिकेत उसके फोन के इंतजार में था इसलिए अगले तीसरे दिन वह खुद उसके उसी नंबर पर कॉल कर लेता है, फोन झलक उठाती है, बहुत देर तक झलक इधर उधर की बात करने के बाद जब पलक उसके पास किसी काम से आती है तो उसकी तरफ मोबाईल बढ़ाती हुई धीरे से उसके कान के पास फुसफुसाती है – “पंडित जी का फोन है – बात करो|”

पलक तब से उसे फोन पर बात करते देख रही थी इसलिए अब फोन देने पर भौचक्की सी उसकी ओर देखती है इस पर अपनी शरारती मुस्कान से मुस्कराती झलक फिर धीरे से कहती है – “टाइम पास कर रही थी – चल बात कर – तेरे लिए फोन आया था|” कहती हुई वहां से फुदकती हुई चली जाती है|

पलक को पता था फोन पर देर तक फालतू बात करना झलक के लिए कुछ नया नही था| वह मोबाईल कान से सटाए हेलो बोलती इत्मीनान से बैठ जाती है|

“कैसी है आप ?”

“ठीक हूँ |”

“मैंने बस आपके हाल चाल के लिए फोन मिलाया था – अब तो आपको अजीब सपने नही आते !!”

इस पर पलक कुछ पल मौन रह जाती है पर अनिकेत इसका कुछ और अर्थ लेता उससे पूछता है – “कहीं मैंने गलत समय तो नही मिला लिया – आप अगर व्यस्त है तो..!!” अपना वाक्य अधूरा छोड़ता अनिकेत चुप हो जाता है|

“नहीं ऐसा कुछ नही है – असल में मैं आपके प्रश्न का उत्तर ही खोज रही थी क्योंकि तब से अब तक कुछ भी तो नही बदला – एक से सपने एक सा अहसास – अभी भी वे अहसास मुझे भयभीत कर देते है|” पलक जैसे एक एक शब्द अंतर्मन से खींचती हुई उसे कहती है ऐसा करते एक अदनी सी उदासी उसके चेहरे पर ठहरी हुई थी|

“अगर ऐसा है तो मैं पूरी बात जानना चाहूँगा तभी कोई रास्ता निकलेगा – |” इस एक बात पर दोनों खामोश हो जाते है|

बात करते करते पलक देखती है कि झलक कुछ हाथ में लिए खाती खाती उसे आवाज लगाकर बताती है कि उसे माँ बुला रही है, ये सुन पलक जल्दी से कहती है –

“माँ बुला रही है – |” घड़ी की ओर देखती है, अभी रात के नौ बज रहे थे – “मैं आपसे कल बात करती हूँ|”

“कब ??”

“सुबह मंदिर से लौटकर आते – ओके अनिकेत जी बाय |” जल्दी से बाय कहती फोन रखती कमरे से निकल जाती है और उधर अनिकेत अफ़सोस से फोन लिए लिए बैठा सोचता रह जाता है|

अनबुझे रहस्यों से बेचैन मन ईश्वरीय चरणों में ही सुकून पाता इसलिए अब ये पलक की आदत में शुमार हो चुका था मंदिर जाना| वह घर से दौ सौ मीटर की दूरी पर स्थित महादेव के मंदिर से निकली  ही थी कि किसी को सामने देख वह चौंक सी गई, सादे कुर्ते में उस लम्बी काया को वह सहज ही पहचान गई वह अनिकेत था जो मुख्य गेट से आता उसे देख मुस्करा रहा था|

पलक हैरान उसकी ओर बढ़ती पूछती है –

“आप भी यहाँ आते है ?”

पलक के भोले से प्रश्न पर उसके चेहरे की मुस्कान और गहरी हो उठी, वह आखिर क्या बताता उसे कि बाराबंकी जैसे इलाके में पलक के घर के नजदीक वाले मंदिर को ढूँढना उसके लिए कौन सी मुश्किल बात थी पर ख़ामोशी से आंख झपकाते वह हाथ जोड़ता उसके आगे प्रसाद के लिए हाथ फैला देता है|

चौंकती हुई पलक पूजा थाली से लेकर प्रसाद उसकी फैली हथेली के बीच रखती है|

“वैसे सुबह सुबह अच्छे दर्शन से बड़ा प्रसाद कोई नही – आप रोज आती है क्या ?”

पलक हाँ में सर हिला देती है|

“आपकी बहन !”

“नही – वो सो रही होती है|”

अनिकेत बाहर निकलते निकलते उसके संग बात करता आता है|

“आपकी परेशानी का एक हल लाया हूँ बस दो मिनट आपसे बात करना चाहूँगा |”

ये सुन पलक मंदिर के आस पास देखती है, वे मंदिर से निकलकर सड़क के किनारे खड़े थे और यहाँ बहुत देर खड़े रहना कतई अच्छा नही लगता तो हाँ में सर हिलाती वे साथ में मंदिर के पीछे वाले चबूतरे की ओर चल दिए, असल में पलक खुद इतना परेशान थी कि जरा भी सांत्वना उसे उत्साहित कर गई|

अब वे साथ में मंदिर के पीछे वाले हिस्से पर बैठे थे| अनिकेत जल्दी से अपनी बात कहना शुरू करता है – “मैं सपनो के बारे में ज्यादा कुछ तो नही जानता पर मेरा एक दोस्त है जॉन – वह ओनिरोलोजी का अध्यन करता है |” पलक के चेहरे के प्रश्नों को पढ़ते वह अपना कहना जारी रखता है – “ओनिरोलोजी मतलब स्वप्न विज्ञान का अध्यन – आपके इन सपनों से जुड़े हर सवाल का जवाब उसके पास जरुर मिलेगा |”

“ओह क्या ऐसा कुछ होता है !!”

“बिलकुल इस संसार के कण कण में रहस्य है यूँ तो मानव का इतना दंभ कहाँ कि वे हर रहस्य को समझ सके पर हाँ विज्ञान की सहायता से कुछ कुछ तो हम जान ही सकते है इसीलिए तो कह रहा हूँ कि ओनिरोलोजी की सहायता से आप अपने इस अज्ञात सपनों को समझ सकती है |”

“तो ये संभव कैसे होगा ?”

“उसके लिए तो आपको उससे मिलना पड़ेगा |”

इस बात पर पलक अनिमिख उसकी ओर देखती रही तो अनिकेत उसे आश्वस्त करता कहता है – “वैसे वो इस वक़्त शहर से बाहर है लेकिन मैं उसे यहाँ बुला लूँगा – तब आप अपने हर प्रश्न का उत्तर खुद उससे पूछ लीजिएगा |”

“क्या सच में !!” एकाएक पलक खुश होती हुई बोली|

“हाँ बिलकुल |”

उस वक़्त पहली बार पलक के चेहरे पर भरपूर मुस्कान तैर गई जिसे कुछ पल अपलक अनिकेत चुपचाप देखता रहा|

“मुझे तो ये सुनकर ही सुकून लग रहा है और जब हल मिल जाएगा तो वाकई मुझे बहुत अच्छा लगेगा आपको थैंक्स |”

फिर उससे विदा लेती पलक घर की ओर चल देती है और अनिकेत मंदिर की ओर|

पलक सिर्फ ये सुनकर ही इतनी खुश थी कि झलक को बताए बिना न रह सकी और वह भी उतना ही चौंकी जितना पलक चौंक गई थी|

“एक जरा से सपने के लिए भी कोई विज्ञान है क्या – चलो है तो है – मजा आएगा |’ हाथ मलती उछलकर बैठती झलक बोली – “ये पंडित जी तो कमाल के है |”

इस बात पर पलक को हँसी ही आ गई, झलक हर किसी का कुछ न कुछ नामकरण कर फिर उसे उसी नाम से बुलाती जो अक्सर मजेदार ही होता|

दोनों किसी अनजान बात पर हैरान जितना थी उससे कही अधिक उत्साहित थी| इससे दोनों जब एक साथ सपनो की बात पर खिलखिला रही थी तो वहां से गुजरती माँ की आवाज उनके कानों से टकराई – “अरे दोनों सपनों की दुनिया से वापस आओगी आज शाम पूजा है जल्दी आओ – अब तो दिन में भी सपने देखती रहती हो क्या !”

माँ की नाराजगी भरी आवाज पर दोनों दांतों तले जीभ दबाती उछलती हुई बोली – “चलो झल्लो जल्दी आओ |”

“हाँ हाँ – आज फिर खीर पूड़ी मिलेगी – भगवान पानी के बताशे क्यों नही खाते – उनको थोड़ा टेस्ट चेंज करके देखना चाहिए |”

झलक की बात सुन सर पर हाथ मारती पलक बिना कुछ कहे बस उसका हाथ पकड़कर कमरे से बाहर निकल गई|

पूजा हुई तो पंडित जी के साथ अनिकेत भी आया, इस बार वे उससे अजनबी की तरह नही बल्कि दोस्त की तरह मुस्करा कर मिली और फिर जब अनिकेत अपने दोस्त जॉन के आने की खबर देता है तो पलक धीरे से उसे बताती है कि ये बात वह उसके पापा को न बताए क्योंकि वे उसको लेकर बहुत जल्दी परेशान हो जाते है, वह जब सब जान जाएगी तब खुद ही उन्हें सब बता देगी| अनिकेत भी सहमत होता कल ही उसे मुलाकात के लिए बुला लेता है|

पलक अपने रहस्यमयी सपने को सुलझाने के लिए कुछ ज्यादा ही उत्साहित थी, वे दोनों अपनी सहेली के घर जाने का बहाना बनाती साथ में बाहर चली जाती है| एक सुनिश्चित जगह अनिकेत कार लिए उन्हें मिल जाता है| जहाँ से वे साथ में किसी घर के बाहर रुकते है| उस घर की ओर बढ़ते अनिकेत उसे बताता है कि ये उसके उसी दोस्त का घर है पर वह अक्सर बाहर रहता है जिससे ये घर बंद ही पड़ा रहता है और उस घर की उखड़ी हालत देख उन्हें इस बात का अच्छे से अंदाजा भी हो जाता है|

अब एक साफ़ किए गए कमरे में बहुत ही कम सामान के बीच वे चारों खड़े थे| अनिकेत, पलक, झलक और जॉन| पलक देखती है एक मध्यम कद काठी का दुबला सा लड़का था जिसके भूरे झप्पर से बाल उसके छोटे चेहरे पर कुछ ज्यादा ही घने लग रहे थे| पर उसकी ऑंखें जैसे कोई रहस्मयी दरवाजा थी वह किसी किताब को अपने बगल में दबाए सीधे मुद्दे पर बात कर रहा था|

“मुझे अनिकेत ने जैसा बताया क्या वाकई आपको कोई एक सा सपना आता है?”

“हाँ |”

“तो याद है आपको कि क्या देखती है आप ?”

“नही बस अहसास होता है कि रोज ही एक ही तरह की स्थिति से गुजरती हूँ |”

“तो आप अपने सपनो को जानने को तैयार है ?”

“हाँ |” पलक हिचकिचाती हुई हाँ कहती अबकी बारी बारी से अनिकेत और झलक को देखती है जो उन दोनों के प्रश्न उत्तर पर गौर से अपनी नज़रे जमाए थे|

“ठीक है पहले मैं आपको ये बता दूँ कि इसके लिए मुझे आपके सपनो को जानना होगा और उन सपनों की प्रकृति मैं जान कर ही मैं आपको लुसिड ड्रीमिंग करा पाउँगा |”

“लुसिड ड्रीमिंग !!”

अबकी सब एक साथ चौंककर उसकी ओर देखते है| उनके लिए सपनो को जानने का कोई वैज्ञानिक आधार और उस पर कोई नाम होगा ये सब हैरान कर देने वाली बात थी पर इसके विपरीत वह किसी प्रोफेशनल की तरह अपनी बात समझाता रहा|

“लुसिड ड्रीमिंग मतलब अपने सपने में उतरकर उसे जानना इसके लिए आपको एक काम करने होंगे – मतलब कि इस प्रक्रिया में उतरने से पहले आपको एक होम वर्क करना होगा वो भी पूरे सात दिन तक फिर उसके बाद ही मैं आपको तय करके बता पाउँगा कि आपको वाकई लुसिड ड्रीमिंग की जरुरत है भी कि नही |”

“तो क्या करना होगा मुझे ?” अबकी घबराई सी पलक पूछती है|

“बस जब भी आप रात में सपने से जागती है तो एक नोट तैयार करना होगा – मतलब कि अपना सपना पूरा का पूरा कागज पर लिखना होगा और ये रोजाना आपको करना होगा साथ ही आपको ये भी ध्यान रखना होगा कि इसे आपको उठने के दस मिनट के अन्दर ही कर लेना है क्योंकि सपना देखकर उठने के दस मिनट के बाद से हम सपना भूलने लगते है इसलिए सोने से पहले आपको तारीख डालकर उस नोट को पास रखकर सोना होगा ताकि उठते ही आप उसपर लिख सके और रोजाना सात दिन तक इसे करना होगा फिर उसे देखने के बाद ही हम आगे के बारे में बात करेंगे |”

“ओके |” पलक हैरान सी बस यही कह पाई|

जॉन का भाव हीन चेहरा देखते वह अब घबरा गई थी, कुछ समय पहले जिस बात पर वह उत्साहित थी अब उस जगह डर समा गया था पर सच को जानने के लिए उसे ये करना ही था|

वे तीनों तुरंत ही वहां से निकल गए| अनिकेत उनको घर से कुछ दूर छोड़कर रुकता पलक की ओर देखता उसे आश्वस्त करता कहता है – “आपको मैं ये नही बता पाया असल में वह थोडा अजीब है लेकिन यकीन मानिए वह आपके सपनो की समस्या के समाधान के लिए बिलकुल उपयुक्त व्यक्ति है – आपको घबराने की जरुरत नही है बस जैसा उसने कहा है वैसा ही करिए बाकी मैं तो हूँ न आपके साथ |” अपना आखिरी शब्द वह धीरे से कहकर खत्म करता मुस्करा कर उन्हें विदा करता है|

वे दोनों हैरान भाव से अब घर की ओर चल देती है अबकी झलक के चेहरे में भी अनजाने हैरानगी भरे भाव थे| वे समझ भी नही पाई कि स्वप्न विज्ञान भी कोई इतना जटिलता से भरा होगा| 

क्रमशः…………………

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