Kahanikacarvan

बेइंतहा सफ़र इश्क का – 202

मेंशन में जो सुबह से तूफ़ान उठा था उसकी लपट अभी तक सबके मनो में लहर मार रही थी| मेनका जो अभी अभी अपने कमरे में लौटी थी और सहसा उसे ख्याल आया कि वह तो कॉल पर थी| कई दिन बाद जाकर आज विवेक उससे बात करने को राजी हुआ था पर बात होती उससे पहले मेंशन का शोर सुनती वह वही आ गई और इस अनजाने में उसे पता ही नहीं चला कि वह कॉल पर थी| अब जाकर उसे अपनी टूटी तन्द्रा से होश आया और वह झट से कान से लगाए हेलो हेलो कहती उसे पुकारती है पर अब वहां कोई नही था| वह बेहद अफ़सोस से बैठ जाती है|

वही अरुण उस पल में इतना आक्रोश से भर उठा कि सीधा किरन का हाथ पकड़े उसे वहां से लिवा गया कि तभी एक रिंग से उसका ध्यान अपने मोबाईल पर गया जिसे तुरंत ही अपनी पॉकेट से निकालता वह सुनता है| उस पार ब्रिज थे और थोड़ा परेशान स्वर में उसे ऑफिस आने को कह रहे थे| हालाँकि वह कॉल तो रोज ही करते पर आज उनका कॉल एक बार में ही रिसीव कर लिया गया था|

कॉल डिस्कनेक्ट करते उसे अपनी पॉकेट के सुपुर्द करता वह किरन से अपना ऑफिस जाना कहकर तुरंत ही बाहर चल देता है|

***
सबके मन से वह सच कैसा गुजरा ये न भूमि ने जानने की कोशिश की और न जरुरत समझी| उसके लिए तो जैसा कल था वैसा ही आज भी था| वह अपने बच्चे साथ उसकी दुनिया में खुश थी हाँ इस सच के बाद से एक हल्का डर जरुर उसके चेहरे पर बार बार पसर जाता….क्षितिज से जुदा होने का डर !! पर जल्दी ही हर संभावना को वह दरकिनार करती फिर से क्षितिज संग घुलमिल जाती और उसके बातो पर मुस्करा उठती|

क्षितिज अपनी चोट की वजह से कई दिनों से स्कूल नही गया था इससे वह बोर हो रहा था और बार बार अपनी माँ संग बाहर कही चलने को कह रहा था पर उसकी तबियत के कारण वह उसे बाहर नही ले जा सकती थी| क्षितिज बस यही जिद्द लिए रूठ गया| इस वक़्त किरन भी वही बैठी थी जो क्षितिज को बहलाने लगी| वह अपनी बातो से जल्दी ही उसे कही बाहर जाने का विचार भुलवा देती है और भूमि हमेशा की तरह उन्हें साथ में बाते करते देख उनकी बातो पर मुस्करा लेती|

वह बता रहा था कि पाशा से उसे कितने तरह के जादू समझ आ गए पर वह उन्हें कर नही पाता क्योंकि अभी वह छोटा है न लेकिन एक दिन बड़ा होकर वह जादू करेगा और उसके डैडू फिर कभी किसी पर गुस्सा नही करेगे और तब वो सबसे बेस्ट वाले डैडू बन जाएँगे| ये सुनते भूमि का चेहरा एक बार फिर दहल उठा|

कुछ बाते शायद समय और वक़्त तय करता है और उस वक़्त भुगतता भलेही इन्सान है पर उसकी भूमिका नगण्य ही रहती है| एक तरह से वक़्त के हाथो की कठपुतली बन जाता है इंसान और जो इस वक़्त हालत भूमि की हो रही थी|

तारा और आकाश का सच जानकर भी वह उस सच को याद नही करना चाहती थी तो वही उनकी औलाद उसके दिल का टुकड़ा थी| तारा के ठीक होने पर क्या होगा उसे नही पता ? वह शायद ये सच भी उसे बता दे !! इससे क्षितिज के खोने का डर भी उसके मन में पनप जाता फिर भी वह जिस उद्देश के साथ जीवन जीती थी उससे वह तारा को उसकी हालत में भी नही छोड़ सकती थी| गहरे कशमकश में उसकी जिंदगी फसी थी|

अब ये उसके जीवन की विभीषिका ही थी कि नारी उत्थान के लिए काम करने वाली भूमि के पति की नज़र में औरतो की कोई इज्जत नही थी| उसके लिए वह बस खिलौना मात्र थी| वह एक गटकन के साथ ये साथ सच जैसे अपने भीतर उतार लेती है|

तभी कमरे में एक आवाज हुई और उसका सारा ध्यान उस दिशा में चला गया| दीवान साहब उस कमरे में आए थे और वह आश्चर्य से उन्हें देखने लगी| आखिर ये पहली बार हुआ था कि वह उसके पास खुद आए थे नहीं तो जिसको जो कहना होता वो उनके पास खुद ही चला जाता|

भूमि उस पल इतनी अवाक् रह गई कि शिष्टाचार के नाते उन्हें बैठने तक को न पूछ सकी| वे भी आते क्षितिज के पास आकर खड़े थे इससे किरन जल्दी से खड़ी होकर उन्हें बैठने को कहती साइड सोफे की ओर संकेत करती है पर वे क्षितिज के पास आकर बैठते उसके सर पर हाथ फिराते उसका हाल लेने लगते है|

भूमि चुपचाप खड़ी सब देख रही थी कि वे किस तरह से उसे पुचकारते बात करते उसकी चोट को स्नेह से सहला रहे थे| कुछ देर बाद वे भूमि की ओर देखते हुए कहते है –

“भूमि मुझे तुमसे कुछ बात करनी है |”

भूमि बस थोड़ा आगे आ जाती है पर कुछ कहती नहीं| किरन वक़्त की नजाकत को समझती क्षितिज को अपनी गोद में लेती हुई कहती है –

“चलो क्षितिज – तुम्हे टेरिस से एक जादू दिखाती हूँ |”

“जादू…!!!”

“हाँ भगवान् जी का जादू – आसमान में वे कैसे तरफ तरफ के जादू बनाते है चलो दिखाती हूँ|”

किरन उसे बहलाती अपने साथ ले जाती है| अब कमरे में दीवान साहब और भूमि मौजूद थे और जिनके बीच कुछ पल तक ख़ामोशी छाई रही जैसे वे भूमि से जो कहने आए थे उसके लिए अपने अंदर से हौसला जुटा रहे थे| जबकि भूमि उतनी ही निर्लिप्त खड़ी थी|

***
अनमोल जी एक दिन पहले ही देवनगरी से सूरत चले आए थे| इस बार उनका मकसद सिर्फ शांति पाठ को अटेंड करना ही नहीं था बल्कि कुछ और भी था| वे काफी देर से रंजीत के ऑफिस के बाहर उससे मिलने की प्रतीक्षा कर रहे थे| पर रंजीत अभी तक उनसे नही मिला था| वे कई बार अपने ओपिन्टमेंट के बारे में रिसेप्शन पर दोहरा देते और बदले में रंजीत मीटिंग में यही सुनने को मिलता रहा|

रंजीत जो इस वक़्त अपने ऑफिस में था और जानकर खुद को व्यस्त किए था क्योंकि अपने दबे नासूरो को हरा होने से उसमे एक डर था| उसे लगा काफी देर यूँही बैठाने से शायद वे चले जाए इससे वह बहुत देर बाद अपने ऑफिस से बाहर निकला और अपने काले चश्मे के पार से रिसेप्शन के आस पास उनको न पाकर बाहर की ओर निकल जाता है|

उसके बाहर निकलते पोर्च पर तुरंत ही कार आकर खड़ी हो जाती है| वह दरबान द्वारा पिछला गेट खोलने पर बस बैठने ही वाला था कि उसे कोई आवाज टोक देती है| वह पलटकर नही देखता बस कार के दरवाजे के काले कांच से कौन था उसका आभास ले लेता है|

वे अनमोल जी थे जो उसे रोक रहे थे| पर रंजीत जानकर उनकी आवाज को अनसुना करता जाने लगा तो वे इस उम्र में भी भरसक दौड़ लगाते उसकी ओर बढ़ने लगे कि तभी वे बुरी तरह लडखडा गए और फर्श पर गिरने लगे|

रंजीत जिसकी नजर सामने होते हुए भी उसका आभास पीछे की ओर था झट से पीछे मुड़कर उन्हें थाम लेता है| वे बस फर्श पर गिरने से कुछ इंच पर रह जाते है|

रंजीत कसे हुए हाव भाव से उन्हें देखता हुआ सीधा करता है अब उसकी मदद को उसके सिक्योरटी गार्ड भी आ जाते है|

रंजीत अब उन्हें सहारा देकर बिना कुछ कहे फिर वापस जाने लगता है तो वे तुरंत टोकते कह उठते है –

“जिस पहचान के नाते तुमने मेरी मदद की – उस नाते ही मुझे अपना दो पल दे दो रंजीत -|”

उनकी आवाज सुनते रंजीत चलते चलते रुक जाता है और बिना पलते ही कहता है –

“ऐसा क्या कहना है आपको ?”

“वो सच जिसे झूठ माने तुम जी रहे हो ?”

अबकी रंजीत उनकी ओर पलटता हुआ ठीक उनके सामने खड़ा था और अपने दोनों हाथ पॉकेट में डाले कहने लगा –

“किस सच की बात कर रहे है आप ? और अचानक आज इसकी जरुरत भी क्या पड़ गई ?”

“कोशिश तो कई सालो से कर रहा हूँ पर आज वक़्त ने मौका दे ही दिया – नहीं तो आज भी मैं वापस लौटने वाला था|”

रंजीत इसपर कुछ नहीं कहता बस उसी तरह तनकर उनके सामने खड़ा रहता है| रंजीत को चुप देखकर वे आगे कहते है –

“घवलभाई की आखिरी इच्छा थी बस वही पूरी करना चाहता हूँ |”

“कौन धवलभाई ? मैं ऐसे किसी शख्स को नही जानता |” जितना कठोर भाव ला सकता था उससे ज्यादा ही लाता हुआ रंजीत कहता है|

“ऐसा मत कहो बेटा – वे तुम्हारे पिता के बहुत गहरे दोस्त थे |”

“इसलिए इतने गहरे से घाव भी कर सके|” दांत पीसते हुए वह कहता है|

“इसलिए तो कह रहा हूँ – एक बार सुन तो लो सच |”

“आप अपना सच अपने पास रखिए – मुझे इसकी जरुरत नही है |”

कहता हुआ रंजीत फिर वापस को चल दिया|

ये देखते वे जल्दी से कह उठे –

“धवलभाई ने कोई धोखा नहीं किया – बल्कि धोखा तो उनके साथ हुआ बेटा |”

रंजीत आगे बढ़ते बढ़ते रुक गया|

वे कहते रहे –

“धोखा तो भूमि के साथ हुआ – कम से कम उससे जुड़ा सच जान तो लो – बस यही आखिरी इच्छा थी उनकी और जिसकी प्रतीक्षा में मैं कई सालो से हूँ |”

भूमि का नाम था या वो अतीत का सच जानने की जिज्ञासा जिसके कारण रंजीत फिर आगे न बढ़ सका|

अगले कुछ पल में वह अपने ऑफिस के एकांत स्टडी एरिया में उनके सामने खड़ा था और वे अपनी उखड़ती साँसों को सयंत करते उनके सामने बैठे थे| वे गिलास भर पानी खत्म करके रंजीत की ओर देखते है जो उनकी ओर पीठ करे सीने में हाथ बांधे खड़ा था|

आखिर क्या फैसला होगा भूमि की आगे की जिंदगी का ? रंजीत इतने वर्षी बाद सारा सच जानने के बाद क्या करेगा ? क्या अब उनकी मुलाकात होनी तय है ??

क्रमशः……..

20 thoughts on “बेइंतहा सफ़र इश्क का – 202

  1. अगले भाग का बेसब्री से इंतजार रहेगा जी, अब तो हमें भी सच जानना है और दिवान साहब व भूमि के बीच क्या बात हुई इसकी भी जिज्ञासा बढ़ती जा रही है 👌👌👌👌👌👌👌🙏🙏

  2. Shandar……aaj to kyi Jane apne apne dukh me fas gye….Vivek ne jb shitij or Tara ka such suna hoga to uspr kya beeti hogi…or ab bhumi k aage ka bhawishy bhi fas gya…..or jb Ranjeet ko Sara such pta chalega to uska kya hoga….hey bhagwan

  3. Deewan shaab ab jarur bhumi ko hi support karege…..Ranjit ko ab sara sach pta lga h ab vo deewans se or jayada nafrat karega…..lekin sabme bhumi ka kya dosh h….Niyayi ne pta nhi uske liye kya fesla liya h

  4. Achcha part tha bhut dini bad kuch halka tulna sa….😊 Par isme 3 kadi aduri h.. waiting for next part…..

  5. Next part me teeno baatein Puri kijiye.. bhoomi aur diwan sahib ke beech kya baat Hui.. Ranjit ka kya reaction hoga sach jaan kar..
    Kahi Vivek shitij ko apne paas rakhne ki jidd na kare.. kya hoga bhoomi ka fir..

  6. Kya bolne aaye hai diwan sahab bhumi se . Kon sa Naya dhamaka karengi aap ab . Early waiting for next part.

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