Kahanikacarvan

हमनवां – 78

“मानसी ध्यान से सुनो – अभी कुछ देर में पंडित जी आने वाले है तब कंगन पूजा होगी और तब तक तुम्हे फास्ट रहना है – मतलब मुंह झूठा नही करना – बस थोड़ी देर की बात है – समझी न !!”

मानसी के सामने खड़ी उसकी मौसी उसे थोड़ा सख्ती से समझा रही थी और मानसी भी चुपचाप हाँ में सर हिलाती हुई हामी भर रही थी|

वो स्थूलकाय शरीर वाली मानसी की मौसी थी जो हमेशा अपनी बात कुछ इसी सख्ती से कहती| ये उनका स्नेह जताने का अजब तरीका था| मानसी भी सबसे बहस कर सकती लेकिन अपनी मौसी के आगे चुप ही हो जाती| नहीं तो बदले में एक लम्बा लेक्चर की उम्मीद बंध जाती|

होटल का वह रूम मानसी के लिए था जहाँ उसे अभी हल्दी रस्म के लिए तैयार होना था वहां इरशाद भी नूर के साथ मौजूद था| मौसी की ताकीद देकर जाते मानसी राहत का एक लम्बा सांस बाहर छोड़ती हुई धप से बैठती हुई इरशाद की ओर देखती है –

“इरशाद – चोकोलेट स्ट्रॉबेरी स्प्लिट आई क्रीम ले आना |”

वह आराम से अपनी बात कहती बैठ जाती है पर ये सुनते इरशाद चौंकते हुए कहता है –

“तुमने सुना नही कि मौसी जी अभी क्या कहकर गई है – |”

इरशाद के एतराज पर मानसी कहती है –

“हाँ तो अपने लिए थोड़े मंगा रही – नूर और अपने लिए लेकर आओ |”

“तो ठीक है |” कहता हुआ आज्ञाकारी बच्चे की तरह सर हिलाते इरशाद बाहर निकल जाता है और पल में दो कांच के कप में आइसक्रीम लाकर हाजिर हो जाता है जिसमे से एक नूर की ओर बढ़ाकर दूसरा कप लिए बैठने ही लगता है कि मानसी उसे उसके हाथ से लेती हुई कहती है –

“कितनी बैड मैनर है एक बीवी के लिए ले आए  और दूसरी मुझे नही दे सकते ?”

इसपर इरशाद चिहुकता हुआ कह उठा – “पर अभी तो मौसी जी तुम्हे मना करके गई है न |”

“हाँ तो मैं थोड़े खा रही – अब तुम दोस्त हो तो मुझे जबरजस्ती दोगे न |”

“मैं क्यों दूंगा तुम्हे जबरजस्ती ?”

“वाह – अपनी बीवी को दे सकते हो – मुझे नहीं दोगे – इस तरह मैं थोड़े खा रही बल्कि तुम मुझे जबरजस्ती दे रहे हो |”

“अच्छा मना करने के बाद भी खाओगी तुम और पाप चढ़ेगा मेरे सर |” इरशाद बच्चो की तरह तुनकते हुए बोला|

मानसी उसके हाथ से आइसक्रीम लेती चटकारे मारती खा रही थी और उन दोनों की नोकझोक देखती नूर मुस्करा दी थी|

मानसी यूँही मस्ती से कहती रही – “तू मेरा बेस्ट फ्रेंड है न !! तो मैं बस तेरी फ्री एंट्री का अरेंजमेंट कर रही हूँ – |”

“मतलब !!”

“अबे वही तो कह रही हूँ थोड़ा मतलबी बन – थोड़ा पाप वाप कर – थोड़े झूठ वूठ बोल तब न तेरी एंट्री फ्री में नरक में होगी – अब देख मेरा तो नरक में जाना कंफर्म ही है तो मैं वहां अकेली क्या करुगी – और तूने कही धोखे से दो चार काम सही कर दिए तो फालतू में स्वर्ग में फस जाएगा – देख मैं रिस्क नहीं ले रही – और हाँ तू न जल्दी पहुँच जाए तो मेरा वेट कर लिजीओ नरक में – हम सब दोस्त वही मिलकर साथ में चिल करेंगे |”

मानसी की बात सुनते जान इरशाद का मुंह डब्बे सा खुला रह गया वही नूर कसकर हँस पड़ी थी| अभी मानसी ने दो चार स्पून आइसक्रीम खाई ही थी कि उस कमरे का दरवाजा खुला और मौसी जी कुछ कहती कहती वहां प्रवेश करती है|

“और हाँ मानसी ..|” कहती कहती वे एकदम से रुक जाती है|

मौसी मानसी की ओर देखती है और मानसी पल में वो कप इरशाद के हाथ में पकडाती नाटकीयता से बोल रही थी –

“ओहो जिद्द मत करो – मैं नही खा सकती आइसक्रीम – माना तुझे अकेले खाना बुरा लग रहा है पर तुझे पता है न मैं बड़ो की बात कभी नहीं इनकार करती |”

मानसी भोलेपन से कहती कप इरशाद के हाथो के बीच थमा देती है और उसे देखते मौसी जी के होंठो पर विजयी मुस्कान तैर जाती है| वे कुछ सामान लेने कमरे में आई थी इससे वे अब मानसी की ओर से नज़र हटाकर साईट टेबल से वो सामान उठाने लगती है| उनके पीछे पीछे सुनीता मौसी जो मानसी के घर में उसकी देखभाल वह अन्य काम के लिए थी वे भी प्रवेश करती है|

जब मानसी की मौसी सामान उठा रही थी उतनी देर में वह चुपचाप मानसी के पास आती अपने आंचल से उसके होंठो के किनारे लगी आइक्रिम जल्दी से पोछ कर सावधान मुद्रा में खड़ी हो जाती है| मानसी समझ गई कि सुनीता मौसी ने हमेशा की तरह उसे बचा लिया नहीं तो यही अगर उसकी मौसी देख लेती तो शर्तिया एक लम्बा लेक्चर उसे मिलता|

वे धीरे से मुस्कराती हुई फिर मौसी के साथ बाहर निकल जाती है| उसके बाहर जाते इरशाद अब अपने हाथ की पकड़ी आइसक्रीम खाने ही वाला था कि मानसी फिर उसके हाथ से लेती हुई  बोलती है –

“चलो अब जल्दी से एक प्लेट मोमोज भी ले आओ |”

मानसी को आराम से अपनी बात कहते और इरशाद का आश्चर्य से खुला मुंह देखती नूर अपनी हँसी नहीं रोक पाई |

***
शाम घिर आई थी और लगभग सारे मेहमान इक्कठे हो चुके थे| हल्दी और मेहँदी रस्म होने वाली थी| सभी के चेहरों पर इसकी मस्ती का रंग भी दिखने लगा था| अश्विन कुमार भी वही होटल में आ गए थे और इस वक़्त बिलकुल भी अपने नेता वाले लुक में नहीं थे| वे गौतम को कह रहे थे –

“गौतम मैंने कहा न – मुझे अपने आस पास आज ये सिक्योरटी वाला दायरा नही चाहिए – आज मैं अपने आप को बिलकुल दुल्हे का बड़ा भाई फील करना चाहता हूँ बस |”

“लेकिन सर – कमिश्नर साहब ने ही कहा है कि आपकी सिक्योरटी कतई ढीली नही पड़नी चाहिए |”

“हाँ तो होटल में जितनी लगानी है लगाओ पर आज मेरे आस पास कोई नहीं रहेगा – मैं अब जय के पास अकेले जा रहा हूँ |”

“सर !!!”

“गौतम यहाँ क्या होगा – कमिश्नर साहब ने मुझे भी बताया था कि इस समय थ्रेड संसद भवन के लिए आया है और वहां मैं हाई सिक्योरटी में रहूँगा पर यहाँ तो बस आज और कल की बात है – मैं जय का बड़ा भई होना तो एक दिन के लिए डिजर्व ही करता हूँ कि हर दिन बस नेता ही बना रहूँगा |”

“ओके सर |”

“और हाँ पुलिस की ज्यादातर सिक्योरटी संसद में है तो यहाँ के लिए मैंने एक प्राइवेट सिक्योरटी कंपनी को हायर किया है – वो बस आने वाली है – उसे लगभग हर कमरे के बाहर लगा देना |”

अपनी बात कहते हुए वे बाहर निकल जाते है और गौतम बस हाँ में ही सर हिला पाता है|

***
सब तरफ तैयारी ही थी| सारे तैयार होकर उस बड़े हॉल में इकट्ठे होने वाले थे जहाँ हल्दी और मेंहदी रस्म के हिसाब से काफी अच्छी सजावट थी| अभी सब पीले रंग के कपडे पहने थे और मुस्कान हल्दाई हुई जा रही थी|

वही हॉल में गीत संगीत की भी व्यवस्था थी| धीरे धीरे सारे मेहमान वहां आने लगे| कुछ देर में वहां सबसे ज्यादा हलचल मच गई| कोई हँस रहा था तो कोई गा रहा था| ढोलक लिए बुआ जी रौनक लगाए थी| वे भगवान् के भक्ति वाले गीत गा रही थी और बाकी ताली बजाते उनका साथ दे रहे थे|

अब बस जय और मानसी का आना वहां शेष था| मानसी कुछ देर पहले जय के कमरे में चुपचाप गई थी| असल में वह चुपके से उसके हल्दी लगाना चाहती थी पर सुबह से ही वह उसे न दिखा और उसका सारा प्लान ही चौपट हो गया| अब अपने कमरे में वह वापस आने लगी तो ऋतु उसे टोकती हुई कह उठी –

“अरे मानसी सब तुंहारा वेट हॉल में कर रहे है – जल्दी से चलो |”

“ओके |”

कहती हुई वह ऋतु के साथ चलने क हुई तो ऋतु उसे फिर टोकती हुई कह उठी –

“मानसी आज तो दुपट्टा ले लो – पूजा भी होगी वहां – सर पर रखन होता है |”

“ओह – अच्छा मैं लेकर आती हूँ |” अपने सर पर टीप मारती मानसी कहने लगी|

असल में हमेशा कैजुअल कपड़ो में रहने वाली मानसी की सलवार सूट जैसे ड्रेस की आदत नही थी| आज भी बड़ी मुश्किल से उसने लहंगा पहना था| अब ऋतु को भेजकर वह वापस अपने कमरे में चल देती है|

कमरे में आती वह उसका दुपट्टा खोजने लगती है| वह उसे खोजने में इतना व्यस्त थी कि उसने ध्यान ही नही दिया कि उसके अलावा कोई और भी कमरे में मौजूद है जो चुपचाप उसके पीछे खड़ा था और उसे अपनी गिरफ्त में लेने वाला था| वह बेहद दबे पैर उसके पीछे मौजूद था|

मानसी अभी अपना दुपट्टा उठा ही पाई थी कि वह हाथ उसे पीछे से पकड़ते अपनी गिरफ्त में लेने लगे कि मानसी भी इस अचानक हुई प्रतिक्रिया पर उसे कोहनी से धक्का दे देती है| ये उसकी त्वरित प्रतिक्रिया थी जिसके फलस्वरूप दोनों का ही बैलेंस बिगड़ता है और वे बिस्तर पर जाकर गिर पड़ते है|

मानसी उसकी देह के ऊपर थी और वह अब और कसकर उसे अपने बंधन में कसे था|

अब मानसी को जरा भी शक न रहा कि वो कौन हो सकता है| वो जय था जो उसे सरप्राइज करते खुद सरप्राइज हो गया|

“यार पेट में मार दिया |”

“तो पीछे से ऐसे चुपचाप आने की क्या जरुरत थी|”

“सोचा कल से पति के पास चली जाओगी तो आज प्रेमी का मिलना हो ही जाए |”

“अच्छा – और जो सुबह से मैं जनाब को ढूंढती फिर रही थी तब कहाँ से जनाब ?”

“अरे कहाँ दुनिया भर से हमे खोजना – हम तो दिल में रहते है आपके |” कहते हुए जय अपना बंधन और कस लेता है|

“अच्छा मुझे छोड़ो – पता है न हल्दी रस्म है |”

“हाँ तो वही पूरा करने आया हूँ – अपने रंग में रंगने |”

कहते हुए वह मानसी के जिस्म को अपने नीचे लेटाते हौले हौले चूमने लगता है| मानसी को जय की इस प्यार के अंदाज पर बेहद हँसी आ रही थी पर किसी तरह अपनी हँसी होंठो के बीच दबाए वह जय को बिना दवाब के धक्का दे रही थी| मानो वह भी इस प्यार के पल का भरपूर आनंद उठाना चाहती थी|

वह उसे शिद्द्त से चूम रहा था और मानसी आंखे बंद किए उसकी गिरफ्त में थी|

“कल से पति की बांहों में होगी तो आज पर तो प्रेमी का पूरा हक है – |”

“जय सब वेट कर रहे होंगे |”

“हाँ तो करने दो |”

“कोई आ गया यहाँ तो !”

“तो कह देना आज प्रेमी के साथ हो और उस पति को थोड़ा इंतजार करने दो|”

“सच में |” कहती हुई मानसी भी अब उस प्रेम के खेल में डूबने लगी|

तभी उनका बिस्तर हलके से थर्रारा उठा| वे साथ में चिहुक उठे| वह बड़ी जोर का धमाका था और ऐसा पटाखे से तो कतई नही होता| मानसी और जय साथ में उठकर बैठते अपने चारो ओर देखने लगते है जैसे सच में ऐसा कुछ उनके कानो में सुना और वे इस बात का खुद को यकीन दिला रहे थे|

सारा होटल जैसे मूक हो गया| मुख्य लॉबी के बीचो बीच वह धमाका हुआ था जिससे कुछ ख़ास नुकसान तो नहीं हुआ हाँ होटल सहम जरुर गया था| उन मेहमानों के बीच कोई अनचाहा आखिर आ ही गया था|

क्रमशः…………………….

5 thoughts on “हमनवां – 78

  1. Ashvin to thik hoga na.. Jai ki shaadi ho bhi payegi.. pehle Mansi gayab ho gyi thi engagement ke time aur ab ye dhamaka

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